Ek Tarfa Pyaar

Bilal Ansari

क्या चाहते हो तुम, ज़रा मुझे बताओ
मगर बिलाल को तुम ऐसे न सताओ

उनकी मर्ज़ी उनकी ख़ुशी, उनका ही फ़ैसल
वो अपने रास्ते चली, मैं अपने रास्ते चल
निभाती अगर वो तो होता मुकम्मल
एकतरफा प्यार में, मैं क्या करता भल

वो अचानक से मेरे सामने आ गई
इत्तेफाकन हमारी नज़र मिल गई
उन्हें तो पता नहीं फ़र्क कुछ मगर
हमारी अंदर से, रूह तक हिल गई

वो तो जैसे मुझसे चुरा रही थी नज़र
जैसे बिलाल ने उनका बहुत कुछ ले लिय
पर मैंने तो सिर्फ वक़्त माँगा थ
और वो भी उन्होंने किसी और को दे दिय

फिर चेहरा न किया उसने मेरी ओर
she was pretending like we had never met before
she treated me like a strange
उसने कर दिया फिर मुझे ignor

बिलाल की ज़िंदगी बर्बाद हो गई
तुम अपने रास्ते में आज़ाद हो गई
मेरे हिस्से आ गए सब दुखों के पहाड
चलो अच्छा है तुमको ख़ुशी मिल गई

हम एक इंसान का शौक रखने वाल
खुद को अब हम कैसे संभाल
बिलाल को अब एक ही काम आता ह
कि कोने में बैठ कर अब आँसू बहा ल

खुद से ही चलना है, अब तेरा सहारा नहीं ह
मेरे पास अब कोई चारा नहीं ह
दर्द के दरिये में डूब रहा ह
दूर-दूर तक अब कोई किनारा नहीं ह

उनकी मर्ज़ी उनकी ख़ुशी, उनका ही फ़ैसल
वो अपने रास्ते, मैं अपने रास्ते चल
निभाते अगर वो तो होता मुकम्मल
एकतरफा प्यार में, मैं क्या करता भल

अब कोई नहीं है जो मुझे हौसला द
और मेरे भले के लिए सलाह द
बिलाल न जाने कहाँ खो गया ह
अब कोई तो हो जो मुझे मुझसे मिला द

अब मुझे कुछ पता नहीं, मैं किसके लिए जी रहा ह
तुमसे उम्मीदें लगा कर, ग़मों को पी रहा ह
याद तो तुमको भी आती होगी, इतना वक़्त जो साथ बिताए
पर जैसा तुम करने लगे, न करता कोई परवाह

जहाँ होती थी तुम्हारे प्यार की बार
अब दिल का जहाँ वो सूख गय
ख़त्म हो गई सारी ख़्वाहिश
मेरा वक़्त तो जैसे रुक गय

तुमने तो बदल लिया अपना रुख
अब किसको सुनाएँ अपनी दास्तान
खुद से ही बातें करता ह
बिलाल को नहीं अब किसी से वास्त

उनकी मर्ज़ी उनकी ख़ुशी, उनका ही फ़ैसल
वो अपने रास्ते, मैं अपने रास्ते चल
निभाते अगर वो तो होता मुकम्मल
एकतरफा प्यार में, मैं क्या करता भल

गैरों से क्या आस लगाए, जब अपने ही क़ातिल ह
खुद की ही अदालत में, खुद ही हम वकील ह
ये कैसा मुकदमा है, जिसमें बिना गुनाह, सज़ा ह
तुम्हारे पास कोई सबूत न था, कि आखिर क्या वजह ह

जो तुमने मुझे बनाया था क़सूरवार
अब तो इस क़ैद में, है साँस लेना भी मुश्किल
अब मैं यहाँ से बाहर निकल नहीं पा रहा ह
अब बस यही ज़िंदगी है, बस लेता हूँ गुज़ारिश
इस उम्मीद में कि परों लौट आएगी इस बार

तुम लौट आओगी, ये भ्रम मैंने अभी भी पाल रखा ह
मेरी जगह कोई और होता तो बिखर जाता व
पर बिलाल ने अभी भी खुद को संभाला हुआ ह

बिलाल अंसार

Información de la canción

Composición: Bilal Ansari

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