बिलाल अब तक गाफिल थ
मेरा हमसफर ही मेरी खुशियों का कातिल थ
हाँ, उसके इरादों से बिलाल अब तक गाफिल थ
कैद हूँ सलाखों के पीछे म
हर रोज यही मेरा हाल ह
नहीं इसको मैं उल्लंघ पा रह
चारों तरफ ग़मों की दीवार ह
मन को रोज बहलाता ह
पर तेरी यादें करती शिकार ह
आज भी करती शिकार ह
ज़िंदगी में वो पहले वाला सुकून रहा न
काम हो गया है मेरा सिर्फ आँसू बहान
बीत गया वक्त, और बदल गया ज़मान
पर आज तक बिलाल का दिल
किसी और से लगा न
अटका हुआ हूँ मैं, आज भी तेरे ही खयालों म
कुछ बदलाव न आया मुझ में इतने सालों म
तुझे खोने के बाद भी तुझमें ही खोया ह
अपने आँसुओं में खुद को ही डुबोया ह
टूटे हुए इस दिल की भी सुन ले ऐ खुद
अब बिलाल इस दर्द से चाहता है पनाह
यहाँ नहीं रहा कोई अपना सग
ज़िंदगी हो गई मेरी, किसी मुसाफिर की तरह
मेरा हमसफर ही मेरी खुशियों का कातिल थ
हाँ, उसके इरादों से बिलाल अब तक गाफिल थ
गाफिल थ
याद आते हैं वो लम्हे जब हम साथ होते थ
एक दूसरे के खातिर हम कितना रोते थ
नहीं होता यकीन कि वो सब किस्से झूठे थ
मैं प्यार समझ कर उन लम्हों को जी रहा थ
पर दुनिया की तुझे हर खुशी दे रहा थ
अपनी हर ख्वाहिश छुपा लेता थ
क्योंकि बिलाल तो तेरे हुक्म पर झुक रहा थ
पर तूने इस मोहब्बत में क्या किरदार निभाय
प्यार मुझसे और दिल किसी और से लगाय
बिलाल was blinded by your love
क्यों मैं तेरे इरादों से वाकिफ न हो पाय
अब ये खाली मकान काटता है मुझ
और ये अकेलापन भी खाता है मुझ
क्यों मैंने तुझसे दिल लगाया थ
अपने आप पर ही गुस्सा आता है मुझ
तेरे इश्क में बिलाल हो गया था गुमराह
मेरी आँखों पे पड़ चुका था पर्द
I played my role well
पर तूने क्यों नहीं किया अपना हक अद
तेरे खयालों की रस्सी से मैं बंधा ह
तेरे इश्क में हो गया मैं अंधा ह
चोर कर दिया तेरी बेवफाई न
हो गया तेरे पीछे मैं आधा ह
मेरा हमसफर ही मेरी खुशियों का कातिल थ
हाँ, उसके इरादों से बिलाल अब तक गाफिल थ
राहत का तो नाम-ओ-निशान नहीं ह
पर, बता क्या तू इंसान नहीं है?
क्या तेरा ज़मीर मर चुका ह
क्या बिलाल के तुझपे कोई एहसान नहीं है?
मुझपे कैसी है तेरी ये आदत सवार
बहती है आँखों से अश्कों की धार
आंसुओं का कम नहीं होता बहाव
मुझसे नहीं छूट पा रहा तेरा लगाव
मेरा हमसफर ही मेरी खुशियों का कातिल थ
हाँ, उसके इरादों से बिलाल अब तक गाफिल थ
हाँ बिलाल अब तक गाफिल थ
बिलाल अंसार