कैसी ये जुदाई है, कैसी ये जुदाई ह
बिलाल की आँख भर मेरी आई ह
कैसी ये जुदाई ह

पारो तूने मुझे कहीं का नहीं छोड
बिलाल का दिल ओड़ कर, फिर तूने किस से दिल जोड
आखिर कौन है वो जो तुझे मुझसे ज़्यादा चाहता ह
कौन है वो शख्स जो इतनी जान लुटाता ह

क्या वो तुझे मुझसे भी ज़्यादा वक्त दे पाता ह
क्या वो हर छोटी बात तुझे समझाता है?
क्या तेरे रूठ जाने पे वो प्यार से मनाता है?
जितने efforts बिलाल करता था, क्या वो कर पाता है?

क्या है उसके पास जो बिलाल के पास भी नहीं ह
क्या मैं जान सकता हूँ, मुझ में किस बात की कमी ह
क्या ये सब ठीक है जो तू मेरे साथ कर रही ह
पारो जवाब दे मुझे तू क्यों छोड़ कर गई ह

ऐसा कोई लम्हा नहीं कि तुझे याद न करूँ म
ऐसा कोई दिन नहीं है कि तेरी बात न करूँ म
चाहत थी न मेरी, तू बस चाहत बनकर रह गई
बिलाल कैसे सह पाएगा, जो इतने ग़म तू दे गई

कैसी ये जुदाई है, कैसी ये जुदाई ह
बिलाल की आँख भर मेरी आई ह
कैसी ये जुदाई ह

इंतज़ार था तेरे call का, तेरा call क्यों आया नह
whatsapp पर भी seen करके reply तेरा आया नह
क्यों insta पे तूने मुझे unfollow कर दिय
क्या बिलाल तेरी ज़िंदगी में, कभी खुशियाँ लाया नह

ढूंढ लिया था कोई और, ये पहले ही बता देत
पारो अपनी life से बिलाल को तू पहले ही हटा देत

कह दिया था तूने कर लो breakup 8 october क
या फिर मुझको कर दो block, अगर तुमको कुछ दिक्कत न ह

मन नहीं था बिलाल का फिर भी मानी तेरी बात क
नींद नहीं आ रही थी मुझे उस पूरी रात क

सुबह होने आई लेकिन तेरी कोई खबर न थ
बिलाल बड़ा ही बेकरार था, थोड़ा सा भी सब्र नह
मैं बहुत परेशान था, तुझे मेरी फिक्र न थ
और मुझे भूल जाने में तुझे ज़रा सा डर नह

पारो दिल में तो बस तेरा ही तेरा नाम लिखा थ
कितनी मोहब्बत थी तुझसे, क्यों अब तक नहीं दिखा थ
तेरे आने से पहले बिलाल बड़ा ही मासूम थ
प्यार करना भी मैंने तुझसे ही सीखा थ

पारो कोई तो होती वजह, वजह मुझको बतात
जाते-जाते ये तो कहती, बिल्लू, तेरी ये ख़ता थ
गलती मेरी होती तो मैं ज़रूर माफी मांगत
पर तू ऐसे चली जाएगी, ये बात किसको पता थ

कैसी ये जुदाई है, कैसी ये जुदाई ह
बिलाल की आँख भर मेरी आई ह
कैसी ये जुदाई ह

तूने चैन छीना, कोई बात नहीं, लेकिन सांसें क्यों छीन
क्या मुझे ज़िंदगी जीने का भी हक, है ही नह
धड़कन थमी है, सांसें चले धीमी धीम
बदल जाएगी तू इतनी, ये सोचा था कभी नह

आँखों से आँसू नहीं आए, ऐसा कोई दिन नहीं आता ह
बिलाल चैन से जी के एक पल भी ऐसा कोई दिन नहीं जाता ह
क्या करूँ तन्हाई का हर पल मुझको सताता ह
क्या कसूर है मेरा, क्यों हर वक्त मुझको रुलाता ह

हर पल मैंने तुझको चाहा, प्यार तुझसे बहुत थ
खुद के लिए खुद भी नहीं जितना तू महबूब थ
बस यही मेरे प्यार का सबसे बड़ा सबूत थ
ज़िंदगी हसीन थी और मैं बड़ा ही खुश थ

पर मेरी ये खुशी तुझे रास नहीं आई
ज़िंदगी में बस अब तन्हाई है तन्हाई
हर तरफ बिलाल के तबाही है तबाह

कैसी ये जुदाई है, कैसी ये जुदाई ह
बिलाल की आँख भर मेरी आई ह
कैसी ये जुदाई ह

ज़िंदगी रही तो फिर ज़रूर मिलेंगे हम
पारो, तेरी हुई शुरू और बिलाल की कहानी खत्म

बिलाल अंसार

Información de la canción

Composición: Bilal Ansari

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