तोड़ो, सारे उसूलों को
छोड़ो, जाने दो भूलों को
तू हो बाहों में
और हर जगह तबाही
तबाही तबाही तबाही
तबाही तबाही
तबाही तबाही तबाही
तबाही तबाही
ये लहर, ये हवा
कब चली पूछ के
रूह पे, क्यूँ भला
हो कोई बंदिशें
दुनिया के दस्तूर से
आज ले रिहाई
तबाही तबाही तबाही
तबाही तबाही
तबाही तबाही तबाही
तबाही तबाही
तू मुझे छील दे
साँस की आग से
हर धड़क पे
दोनों हो फ़ना राख से
हर गलत सही
रेत पे लिखी गवाही
तबाही तबाही तबाही
तबाही तबाही
तबाही तबाही तबाही
तबाही तबाही